Facebook के फाउंडर Mark Zuckerberg के पिता की दी हुई किताब और भारतीय संत ने ऐसे बदल दी उनकी जिंदगी


Happy Birthday Mark Zuckerberg: आज यानी 14 मई को फेसबुक (Facebook) के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) का जन्‍मदिन है. बता दें, मार्क जुकरबर्ग का जन्म 14 मई, 1984 को न्यूयॉर्क, अमेरिका में हुआ था. 

मार्क 36 साल के हैं और इतनी कम उम्र इन्होने दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है जो किसी के लिए भी नामुमकिन के बराबर है.

mark zuckerberg birthday special- here are some unknown facts about him
Mark Zuckerberg Birthday Special

सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक बनकर इन्हें इतनी कामयाबी मिली कि जिसके बारे में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इतनी बड़ी कामयाबी मिलने के पीछे दो ऐसी चीजें रही हैं. 

इनके बारे में मार्क हमेशा ही जिक्र करते रहते हैं. एक तो पिता की दी हुई किताब से उन्होंने सही रास्ता चुना और दूसरा भारतीय संत से मिलकर उन्होंने आगे बढ़ना सीखा.


मार्क जुकरबर्ग का परिवार



मार्क जुकरबर्ग ने एक चीनी महिला प्रिसिला चान (Priscilla Chan) से साल 2012 में शादी की थी. मार्क जुकरबर्ग के दो बच्चे भी हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें, मार्क ने अपनी पत्नी के लिए मैंड्रिन भाषा भी सीखी थी.


पिता ने दी थी किताब


मार्क जुकरबर्ग अपने बचपन से ही पढ़ने में काफी अच्छे रहे हैं. शुरुआत से ही इन्हें कंप्यूटर का शौक था. इसलिए उनके पिता ने उन्हें बचपन में ही एक C++ की किताब दी, जिसने उनकी जिंदगी बदल कर रख दी. 
बता दें, C++ एक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग है, इसी की मदद से मार्क ने अपने पिता के लिए एक मैसेजिंग प्रोग्राम बनाया था, जिसका इस्तेमाल उनके पिता अपने डेंटल ऑफिस में करते थे.

फेसबुक से पहले बनाई थी फेसमास



यह उनका पहली बड़ी उपलब्धि थी. इसके बाद मार्क जुकरबर्ग ने अपने कॉलेज के दिनों में फेसमास नाम की वेबसाइट भी बनाई थी. इस वेबसाइट में वह लड़कों और लड़कियों की फोटो डालकर यह बताना चाहते थे कि कौन कितना हॉट है? 

यह काफी हद तक सफल रहा लेकिन कुछ लोगों ने इसकी शिकायत कर दी कि उनसे बिना पूछे उनकी तस्वीरें इन्टरनेट पर शेयर की जा रही हैं.



बात उस समय की है जब मार्क साल 2004 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे तभी उन्हें फेसबुक बनाने का आईडिया आया. उन्होंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक वेबसाइट बनाई जिसका नाम 'द फेसबुक' (The Facebook) रखा था. 



लेकिन अगले साल यानी साल 2005 में इसका नाम बदलकर फेसबुक (Facebook) कर दिया. आपको बता दें, इसके लिए मार्क को अपनी पढ़ाई भी बीच में ही छोड़नी पड़ी थी.

फेसबुक पर लगे थे चोरी के आरोप



बताया जाता है कि फेसबुक वेबसाइट पर कई आरोप भी लगे थे कि मार्क जुकरबर्ग ने यह आईडिया चुराया है. काफी समय तक यह मामला गरम रहा लेकिन बाद में ये ख़बरें आई थीं कि बड़ी रकम देकर मार्क ने उन लोगों से पीछा छुड़ा लिया था.

कठिन दौर में भारतीय संत का मिला सहारा

अपने शुरुआती दौर में फेसबुक ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाया था. क्योंकि उस दौरान गूगल (Google) का ऑरकुट (Orkut) भी मार्किट में था और काफी लोग उसे इस्तेमाल करते थे. 

कम्पटीशन के इस दौर में एप्‍पल (Apple) के सीइओ स्‍टीव जॉब्‍स (Steve Jobs) ने मार्क को भारत आने की सलाह दी और कहा कि वहां जाकर कुछ समय बिताएं.

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इसके बाद मार्क भारत आये और उत्‍तराखंड में नीम किरोली बाबा के आश्रम में करीब एक महीने का समय बिताया. इसी दौरान उन्हें अहसास हुआ कि लोगों को जोड़ना ही सबसे सुखद काम हैं. 

बस फिर क्या था उन्होंने फेसबुक पर और काम करना शुरू कर दिया. इसके बाद दुनियाभर के लोग एक दूसरे से जुड़ते गए और फेसबुक सभी का चाहीता बन गया. 

बता दें, फेसबुक इतना पॉपुलर हुआ कि गूगल को अपनी सोशल नेटवर्किंग साईट ऑरकुट हमेशा के लिए बंद करना पड़ गया.

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