Rabindranath Tagore Jayanti 2020: जानिए रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें


Rabindranath Tagore Birth Anniversary Special


रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था. उनके पिता का नाम देवेंद्रनाथ टैगोर (Debendranath Tagore) और माता का नाम शारदा देवी (Sarada Devi) था. 

उन्होंने अपनी पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल से की थी. टैगोर बचपन से ही बैरिस्टर बनना चाहते थेइसलिए उन्होंने साल 1878 में इंग्लैंड के ब्रिजटोन पब्लिक स्कूल में एडमिशन ले लिया.
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रवींद्रनाथ टैगोर ने लंदन कॉलेज विश्वविद्यालय से कानून का अध्ययन भी किया था. हालांकि वो अपनी ये पढ़ाई पूरी नहीं कर सके और साल 1880 में बिना डिग्री लिए ही वापस आ गए. 

रवींद्रनाथ टैगोर को शुरू से ही कविताएं और कहानियां लिखने का बहुत शौक था. उस दौरान उन्हें गुरुदेव कहकर पुकारा जाता था.

भारत वापस आने के बाद उन्होंने फिर से लिखना शुरू कर दिया. साल 1901 में रवींद्रनाथ टैगोर ने पश्चिम बंगाल के एक ग्रामीण क्षेत्र शांतिनिकेतन में प्रायोगिक विद्यालय की स्थापना भी की थी. 

वह विद्यालय में ही रहने लग गए और लग्गातार अथक प्रयासों से साल 1921 तक यह विश्व भारती विश्वविद्यालय बन गया.


बता देंरवींद्रनाथ टैगोर ने 1880 के दशक में कई पुस्तकें प्रकाशित की जो खूब लोकप्रिय हुईं. इसके साथ ही उन्होंने मानसी (1890) की भी रचना की. टैगोर की इन कविताओं की पांडुलिपि को सबसे पहले विलियम रोथेनस्टाइन (William Rothenstein) ने पढ़ा था. 

ये कविताएँ पढ़ने के बाद वह इतने खुश हुए कि उन्होंने अंग्रेजी कवि यीट्स के साथ पश्चिमी जगत् के लेखकोंकवियोंचित्रकारों और चिंतकों से टैगोर का परिचय कराया.

रवींद्रनाथ टैगोर की काव्यरचना गीतांजलि (Gitanjali) के लिये उन्हें साल 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था. बता देंटैगोर पहले ऐसे गैर यूरोपीय थे जिनको साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था. इतना ही नहीं उन्हें ब्रिटिश सरकार ने 'सरकी उपाधि से भी नवाजा था.

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बताया जाता है कि साल 1919 में हुए जलियांवाला बाग कांड के बाद टैगोर ने सर’ की उपाधि को लौटा दिया था. लेकिन इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने उन्हें यह उपाधि वापस देने की खूब कोशिश की लेकिन वह राजी नहीं हुए.


जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत का राष्ट्रगान रवींद्रनाथ टैगोर ने ही लिखा था. आपको बता देंसिर्फ भारत ही नहीं बल्कि उन्होंने बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए भी राष्ट्रगान लिखे. 

बता देंस्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) के बाद टैगोर दूसरे ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने विश्व धर्म संसद को 2 बार संबोधित किया.

बताया जाता है उन्हें प्रोस्टेट कैंसर थाजिसके कारण 7 अगस्त, 1941 में उनका निधन हो गया. रवींद्रनाथ टैगोर ने न सिर्फ भारत में भी बल्कि विदेशों में भी खूब नाम कमाया था. साथ ही भारत का नाम भी एक नई ऊंचाइयों पर लेकर गए थे.

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